आज दोपहर की मीटिंग में अचानक ध्यान गया कि जबड़ा जोर से भींचे बैठी थी।
करीब 30 मिनट तक तो पता ही नहीं चला।
बात कुछ खास नहीं हो रही थी, बस एक रिपोर्ट पर discussion चल रहा था, फिर भी मुट्ठी बंधी हुई थी।
शाम को 7 बजे बच्चों को खाना देते वक्त भी कंधों में वही अकड़न महसूस हुई।
पता नहीं यह सिर्फ मेरे साथ होता है या दूसरों को भी लगता है कि शरीर पहले बता देता है, दिमाग बाद में समझता है।
