आज सुबह से लगातार meetings लगी थीं।
गिनती करूं तो 4 meetings, एक के बाद एक।
lunch के लिए 2 बजे तक टाइम ही नहीं निकला।
आखिर में डेस्क पर बैठे-बैठे कुछ खा लिया, ठीक से पता भी नहीं चला क्या खाया।
बच्चों का स्कूल से आने का टाइम भी हो गया था, दिमाग वहीं अटका रहा पूरे दिन।
शाम को घर पहुंचकर लगा जैसे दिन कब निकल गया पता ही नहीं चला।
बस आज का दिन कुछ ऐसा ही गया, किसी को बताने लायक तो नहीं है फिर भी लिख दिया।
