ऑफिस का काम बढ़ता जा रहा है और उसका असर शरीर पर साफ दिखने लगा है।
सोचा था अपने लिए थोड़ा वक्त निकालूंगी, पर दो बच्चों के साथ दिन कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता।

पिछले हफ्ते से दोपहर के ब्रेक में सिर्फ थोड़ी देर के लिए बाहर टहलने जाने की कोशिश कर रही हूं।
दफ्तर के पास एक छोटा सा पार्क है, बस वहीं चक्कर लगाती हूं।
पहले दिन तो अजीब सा लगा, जैसे किसी को दिखाना पड़ रहा हो कि मैं टहलने निकली हूं!
धीरे धीरे ठीक लगने लगा है। कैमरा भी कभी कभी साथ ले जाती हूं, पुराना फिल्म वाला।
तस्वीर खींचने से ज्यादा बस हाथ में पकड़े रहने से भी अच्छा लगता है।
रात को सोने का समय भी पीछे खिसकता जा रहा है, बच्चों को सुलाने के बाद जो थोड़ा समय बचता है वो नींद की जगह ले लेता है।
ये टहलना कितना असर करेगा पता नहीं, अभी शुरुआत ही है, और शायद ये मेरे लिए ही काम कर रहा हो, हर किसी के लिए नहीं।
पर उतनी देर के लिए दिमाग थोड़ा हल्का जरूर हो जाता है।
दफ्तर में किसी को बताया नहीं है, बस अपने लिए कर रही हूं।
आप सब में से कोई ऐसे छोटे तरीके अपनाता है क्या, रोज़ के दबाव से थोड़ा हटने के लिए?
