सुबह से बगल वाले घर में drilling चल रही है। सोचा था weekend में थोड़ा सुकून मिलेगा। बेटा भी 9 बजे से जगा हुआ है, नींद पूरी टूट गई।
हफ्ते भर ऑफिस में शोर सहती हूं, अब घर में भी यही हाल है।
पति बोले [शाम तक] रुक जाएगी शायद। पता नहीं कितने बजे तक चलेगी ये।
चाय बनाकर बालकनी में बैठी थोड़ी देर के लिए, वहां भी हल्की आवाज सुनाई दे रही थी।
बच्चों को होमवर्क भी याद दिलाना था, वो अलग टेंशन था। आज का पूरा दिन कुछ ऐसे ही निकल गया।

