ऑफिस का स्ट्रेस अभी हाल में शरीर पर ज़्यादा दिखने लगा है।
गर्दन और कंधों में अकड़न रहती है, रात को नींद भी ठीक से नहीं आती।
पिछले कुछ हफ्तों से सोने का समय भी रोज़ पीछे खिसक रहा था, पहले 11 बजे तक सो जाती थी, अब अक्सर 1 बजे तक जागी रहती हूं।
2 हफ्ते पहले तय किया कि बच्चों के सोने के बाद फोन पर स्क्रॉल करने की बजाय पुराना फिल्म कैमरा लेकर बाहर निकलूंगी।
घर के आसपास बस 20-25 मिनट टहलना, बस इतना ही।
शुरू में लगा बेकार की चीज़ है, थकान में और कहां घूमना।
पर 3-4 दिन में फर्क महसूस होने लगा।
रात की हवा में कुछ अलग-सा सुकून था, गली की लाइटें कैसे जलती हैं वो पहली बार ध्यान से देखा।
बेटी ने एक दिन पूछा, “मम्मी रोज़ कहां जाती हो रात को?”
मैंने बताया तो बोली अगली बार साथ चलूंगी।
अभी तक 12 दिन हो गए हैं, रोज़ तो नहीं लेकिन ज़्यादातर शाम को निकल जाती हूं।
नींद का समय अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ, कभी 12 तो कभी साढ़े 12 बज ही जाते हैं।
पर पहले से थोड़ा बेहतर लग रहा है, गर्दन की अकड़न भी थोड़ी कम हुई है।
मेरे मामले में शायद यही काम आया, हर किसी के लिए ऐसा हो ये ज़रूरी नहीं।
