आज रात फिर देर से घर आई।
शादी का function था, वो भी दूसरे शहर में।

इस महीने अब तक 4 शादियां हो चुकी हैं।
बेटा 9 साल का, बेटी 6 साल की, दोनों को हर बार साथ ले जाना पड़ता है।
शनिवार को ट्रेक की प्लानिंग थी, वो भी कैंसिल हो गई।
अब तक 3 बार कैंसिल हो चुका है।
– शुक्रवार रात – packing
– शनिवार – function
– रविवार सुबह – office का pending काम
सास बोलीं – ‘बहू, थोड़ा सज-संवर के जाना।’
मन तो हुआ बोल दूं (नहीं जाना), पर चुप रह गई।
काम, बच्चे, function, सब एक साथ सिर पर आ गया है।
खुद के लिए 10 मिनट भी नहीं बचते इन दिनों।
