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शादियों के बीच घर भी संभालना पड़ रहा है

आज सुबह से भाग-दौड़ ही चल रही है।
बच्चों को स्कूल छोड़ा, फिर सीधे ऑफिस पहुंची।

इस महीने 3 शादियां हैं, कल शाम एक और के लिए outfit ढूंढने जाना है।
weekend पर trek का प्लान था, वो भी कैंसिल करना पड़ा।

पति बोलते हैं थोड़ा आराम कर लो, पर काम की list कभी खत्म नहीं होती।
बेटी का homework, बेटे का tiffin, फिर शादी की shopping, सब एक साथ सिर पर आ गया है।

रात के 11 बजे तक बस यही सोचती रही कि आज भी (एक घंटा भी) खुद के लिए नहीं निकाल पाई।
दोस्त की शादी में जाना अच्छा लगता है, पर उसकी तैयारी की थकान बिलकुल अलग चीज़ है।

कभी-कभी लगता है सब कुछ एक साथ संभालना भारी पड़ने लगा है।
फिर भी सुबह उठते ही वही रूटीन फिर से शुरू हो जाता है।

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