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ट्रेक कैंसिल हुआ, पहाड़ी पर अकेले निकल गई

रविवार को ट्रेक कैंसिल हो गया, बारिश की वजह से।

ग्रुप सुबह जल्दी निकलने वाला था, रात को ही मैसेज आ गया कि नहीं हो पाएगा।

पहले तो बहुत बुरा लगा, पूरे हफ्ते इसी का wait था।

फिर सोचा घर के पास वाली पहाड़ी पर अकेले ही निकल जाती हूं। बच्चे अभी सो रहे थे, पति भी।

चुपचाप निकल गई। कोई ग्रुप नहीं, कोई बातें नहीं, बस अपने कदमों की आवाज़ (कितने दिनों बाद)।

वापस आते-आते 1 घंटा हो गया, पर इतना अच्छा लगा जितना शायद बड़े ट्रेक में भी नहीं लगता।

आजकल हर वीकेंड किसी न किसी शादी में जाना पड़ता है, ऐसे अकेले समय मिलना मुश्किल हो गया है।

स्किन भी उस दिन थोड़ी हल्की लगी, शायद पसीना निकलने से या बस मन हल्का होने से, पता नहीं।

बच्चों के जागने से पहले वापस आ गई। चाय बनाई, बालकनी में थोड़ी देर बैठी रही।

कभी-कभी ऐसे छोटे पल ही काफी होते हैं।

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