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आज बर्तन रात भर वैसे ही पड़े रहे

आज रात बच्चों को सुलाने के बाद सोफे पर बैठी तो अचानक बहुत थकान महसूस हुई। सुबह से office का काम था, बीच में बेटी का homework भी करवाना था, ऊपर से एक और शादी का card आ गया जो अगले महीने की है।

लगा जैसे दिन खत्म ही नहीं हो रहा था।

रात 11 बजे तक बर्तन वैसे ही पड़े रहे। पति देर से घर आए, उनसे भी कुछ खास बात नहीं हुई, बस चुपचाप सो गई।

weekend पर trek पर जाने का plan भी टाल दिया, [हिलने तक का मन नहीं हो रहा था]।

skin की तकलीफ तो अलग से लगी ही रहती है, बस आज ऊपर से सब इकट्ठा हो गया। किसी को पूरी बात समझाने का भी मन नहीं हुआ, बस मन भारी सा है।

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