आज सुबह ट्रेक पर गई थी, वापसी में बस मिस हो गई।
अगली बस के लिए 45 मिनट खड़ी रही, इतनी देर में बच्चों के मैसेज पर मैसेज आ गए कि मम्मी कहां हो।

अकेले खड़े-खड़े लगा, कितने दिन बाद इतनी देर तक किसी को जवाब दिए बिना चुपचाप खड़ी रही हूं।
फोन भी ज्यादा देर तक नहीं देखा।
अगले हफ्ते से लगातार तीन शादियां हैं, उससे पहले यह अकेला वक्त अच्छा लगा, भले ही बस मिस होने की वजह से मिला हो।
