
आज सुबह 5 बजे उठकर अकेले पास वाली पहाड़ी तक निकल गई थी।
बच्चों और घर के काम में समय ही नहीं मिल रहा था, सोचा आज थोड़ा अपने लिए निकालूं।
ऊपर तक पहुंचने में करीब एक घंटा लगा। हवा ठंडी थी, पसीना भी आया, पर स्किन पर कुछ खास असर नहीं हुआ – सुबह की ठंडी हवा में शायद उतना बुरा नहीं लगता।
वापस आई तो पति बोले – ‘अकेले चली गई, बता तो देती!’
मैंने बात हल्के में ले ली।
इस महीने 3 शादियां हैं, तो अगले कुछ हफ्ते ट्रेक का मौका शायद ही मिले।
आज का वो एक घंटा अपने लिए पूरा जी लिया, बस यही बहुत था।
