आज सुबह से सिर भारी है।
ऑफिस का काम खत्म करके बच्चों को स्कूल से लाई, शाम को याद आया इस महीने की 3rd शादी है।
पिछले वीकेंड जो ट्रेक प्लान था, वो भी कैंसिल करना पड़ा।
शादी वालों को मना भी नहीं कर सकते, बरसों पुराना रिश्ता है।
घर आकर बच्चों का होमवर्क, फिर कपड़ों की इस्त्री, दिमाग को एक पल भी सुकून नहीं मिला।
पति बोले “थोड़ा आराम कर लो”, पर आराम का मतलब भी अब याद नहीं आता।
बस आज मन बहुत भरा हुआ है, किसी से कह नहीं पा रही थी तो यहां लिख दिया।
