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ताकत नाम की चीज़ नहीं बची

सुबह किचन में आटा गूंधते वक्त हाथ अभी भी हल्के कांप रहे थे, रात को कुछ खास हुआ भी नहीं था।

काम इस हफ्ते बिल्कुल नहीं है, 15 दिन से एक भी क्लाइंट का मैसेज नहीं आया, तो सोचा इसी खाली समय में कुछ शुरू करूं।

पर कल शाम बस 3 सीढ़ियां चढ़ी थीं पड़ोसी के घर तक, सांस ऐसे फूली जैसे पहाड़ चढ़ लिया हो, कमजोरी थी ये पता था, पर इतनी है ये आज पता चला।

घर का हिसाब-किताब वाली कॉपी भी फिर से शुरू की है इस महीने, सोचा सेहत का हिसाब भी साथ में शुरू करूं, पर जिम जाने की हिम्मत नहीं है, घर पर क्या करूं समझ नहीं आ रहा।

थोड़ा लंबा लिख दिया, माफ़ करना, बस पूछना था कि किसी ने ऐसे बिल्कुल जीरो से शुरुआत की है क्या, कैसे शुरू किया आपने?

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