आज सुबह ट्रेक पर जाना था। 6 बजे अलार्म लगाया था, लेकिन उठा ही नहीं गया। रात को हाथों की खुजली से नींद बार-बार टूटती रही।
करीब 2 महीने से यही रूटीन चल रहा है। सुबह आईने में देखा तो कलाई पर लाल निशान साफ नजर आ रहे थे।
शाम को एक शादी में जाना है, इस महीने की तीसरी शादी है ये। फुल स्लीव्स वाला कुर्ता निकालकर रखा है, गर्मी में भी। पहले ऐसा कुछ सोचना ही नहीं पड़ता था।
अब हर फंक्शन से पहले यही सोचना पड़ता है कि क्या पहनूं, हाथ कैसे ढकूं।
बच्चों को स्कूल भेजना, ऑफिस का काम, फिर शादी की तैयारी, सब एक साथ चल रहा है। पिछले हफ्ते एक और सहेली ने कार्ड भेजा है, महीने के आखिर में शादी है।
थकान थोड़ी ज्यादा ही महसूस हो रही है आजकल। ट्रेक का प्लान अगले हफ्ते के लिए टाल दिया है। पहाड़ों में थोड़ी देर चुप बैठने का मन बहुत था आज।
कभी-कभी लगता है सब कुछ एक साथ मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। फिलहाल घर के काम निपटाने हैं, फिर तैयार होना है।
