रिटायर हुए ज्यादा दिन नहीं हुए, फिर भी लगता है टाइम कभी खत्म ही नहीं होता।

सुबह से आटा गूथ रही थी, ओवन में ब्रेड डाल दी, अब पूरे घर में खुशबू फैली है। पहले नौकरी में रहते तो ये सब सोचने का टाइम ही नहीं मिलता था।
शादियों का सीज़न भी शुरू हो गया है। एक के बाद एक invite आ रहे हैं। पहले छुट्टी लेकर भाग जाते थे, अब पूरा दिन खाली रहता है तो हर शादी में जाना पड़ता है।
अजीब लगता है, पता नहीं क्यों, इतना खाली समय होने पर भी दिमाग शांत नहीं रहता। हाथों की स्किन अभी ठीक हो रही है तो मेहंदी वाली रस्मों से थोड़ा बचना पड़ रहा है, बाकी सब नॉर्मल है।
