बच्चों को सुलाकर जैसे ही सोफे पर बैठी, घर एकदम सुनसान लगने लगा।
पूरे दिन शोर मचाना, स्कूल का होमवर्क, ऑफिस का काम, सब चलता रहता है।
फिर अचानक रात में सन्नाटा हो जाता है।
आजकल शादियों का सीज़न चल रहा है तो वीकेंड भी अब अपने लिए नहीं बचता।
ट्रेक का प्लान बना था दोस्तों के साथ, वो भी टल गया क्योंकि एक और शादी बीच में आ गई।
पति बोले “अगली बार चलेंगे”, पर पता नहीं वो अगली बार कब आएगा।
बच्चे बड़े हो रहे हैं, अब उतना टाइम नहीं मांगते जितना पहले मांगते थे।
फिर भी दिन खत्म होते-होते थक जाती हूं।
कैलेंडर देखकर लगता है पूरा महीना ही शादियों में निकल जाएगा।
कभी-कभी सोचती हूं अपने लिए वक्त कहां चला गया।
बस यूं ही मन में आया तो लिख दिया।
