बारिश शुरू होते ही मौसम एकदम बदल गया है, ऑफिस से निकलते ही जैकेट पहननी पड़ रही है। वीकेंड वाला ट्रेक भी इस बार कैंसिल करना पड़ा, रास्ते में लैंडस्लाइड की खबर आ रही थी।
सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करते-करते समय का पता ही नहीं चलता।
हवा में नमी बढ़ी है तो हाथों की स्किन भी खिंची-खिंची सी लगने लगी है।
मॉइश्चराइज़र वाला डिब्बा भी लगभग खाली होने को है।
शादी के कार्ड अलमारी खोलते ही सामने पड़ जाते हैं, किसमें क्या पहनना है अभी सोचा भी नहीं।
काम का लोड भी वैसा ही बना हुआ है, शाम को लैपटॉप बंद करते-करते आँखें भारी हो जाती हैं।
फिर भी छोटी-छोटी चीज़ों में (सुकून) ढूंढ ही लेती हूं।
