आजकल हफ्ता इतना भरा हुआ है कि पहाड़ जाने का मन ही नहीं बन पाता।
ऑफिस के बाद सीधे बच्चों के स्कूल के काम, फिर शाम को किसी न किसी की शादी की रस्म।
इस बार सोचा था लंबी ट्रेक पर जाऊंगी पर वो प्लान टल गया।
तो कल शाम को बस घर के पास वाले पार्क में निकल गई।
पहाड़ जैसा तो कुछ नहीं था, बस एक (छोटा) चक्कर लगाया।
पर हवा अच्छी लगी और सिर थोड़ा हल्का हो गया।
सोच रही हूं इस मौसम में हर हफ्ते पहाड़ जाना शायद मुमकिन नहीं है।
शादियां खत्म होते-होते ही अगली शुरू हो जाती हैं।
फिलहाल इतना ही काफी है कि कहीं न कहीं थोड़ा टहल आऊं।
