आज ऑफिस से निकलते-निकलते रात के 9 बजे हो गए.
घर पहुंची तो बड़े वाले का होमवर्क बाकी था, छोटी तब तक सो चुकी थी.
पति टूर पर हैं इन दिनों, तो सुबह से रात तक अकेले ही मैनेज करना पड़ रहा है.
ऊपर से शादियों का सीजन भी शुरू हो गया है… एक भाभी की है, एक कजिन की, दोनों अगले महीने की डेट पर पड़ रही हैं.
क्या पहनना है, हाथ कैसे कवर करने हैं, अभी से सोच के ही थक जाती हूं.
वीकेंड वाला ट्रेक भी इस बार टालना पड़ा, टाइम ही नहीं निकला.
स्किन वाली बात तो साथ चलती ही रहती है, उसका जिक्र फिर कभी सही.
बस आज लिखने का मन हुआ, लिख के थोड़ा हल्का लगता है.
