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आज किसी ने हाल तक नहीं पूछा

आज ऑफिस से निकलते-निकलते बहुत थक गई थी।

सुबह से भागदौड़ में ही दिन निकल गया। बच्चों को स्कूल छोड़ा, सीधा ऑफिस पहुंची।

आज 3 बजे बेटी के स्कूल में PTM थी, ठीक उसी वक्त ऑफिस में भी meeting रख दी गई।

दोनों मैनेज करने की कोशिश में सिर घूम गया जी!

आखिर PTM के लिए 20 मिनट लेट पहुंची। टीचर ने कुछ कहा तो नहीं, पर चेहरे से सब समझ आ गया।

घर लौटी तो लगा किसी को फर्क ही नहीं पड़ता दिन कैसा गुज़रा।

पति का फोन आया, बोले- “खाना बना या नहीं?”

बच्चे अपने होमवर्क में उलझे रहे। किसी ने पूछा तक नहीं कि मम्मी थकी हुई क्यों लग रही है।

कभी-कभी लगता है सबकुछ अकेले ही ढोना पड़ता है। मैं भी तो थक सकती हूं ना, पर यह किसी को दिखता नहीं।

इसी हफ्ते 2 शादियों के कार्ड भी आ गए हैं। समझ नहीं आ रहा टाइम कैसे निकालूं।

वीकेंड पर पहाड़ों की तरफ निकल जाती हूं तो थोड़ी सांस आती है, पर इस बार वो भी नहीं हो पाया, बीच में शादी का फंक्शन आ गया।

बस आज मन बहुत भारी है। किसी को बताने का मन हुआ, इसलिए यहां लिख दिया।

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