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शनिवार का ट्रेक बारिश में धुल गया

शनिवार सुबह ट्रेक का पूरा प्लान बना रखा था।
जूते भी रात को ही निकाल कर रख दिए थे।

सुबह उठी तो बाहर झमाझम बारिश हो रही थी।
मौसम ऐप पर भी दोपहर तक यही हाल दिखा रहा था।

A dog rests on the ground beside a fence, lying with its head on its paws and looking down.

थोड़ी देर खिड़की के पास खड़ी रही।
बस यही सोचती रही कि हफ्ते भर का इंतज़ार यूं ही निकल गया।

फिर घर के काम में लग गई।
नाश्ता, टिफ़िन, बच्चों को तैयार करना, वही रोज़ वाला रुटीन।

बेटी बार-बार पूछती रही,
“मम्मी आज पहाड़ नहीं गए?”
मैंने बस हंस कर टाल दिया।

दोपहर तक बारिश थोड़ी कम हुई तो बालकनी में चाय लेकर बैठ गई।
ठंडी हवा अच्छी लग रही थी, पहाड़ जैसी ना सही।

शाम को सोचा अगले वीकेंड फिर कोशिश करूंगी।
शादियों का सीज़न भी सिर पर है, पता नहीं कब निकलना हो पाएगा।

फिलहाल इतना ही ठीक है, थोड़ा रुक कर फिर निकलेंगे।

कमेंट 5

  • बारिश09.22

    मेरा भी वीकेंड ट्रेक बारिश में धुल गया था अभी!

  • गुनगुन09.22

    बालकनी वाली बात पढ़कर अच्छा लगा जी, मुझे भी बिलकुल यही हुआ था, दुकान की वजह से टहलने का दिन तय कर रखा था और ठीक उसी सुबह बारिश शुरू हो गई, पूरे दिन दुकान में ही बैठे रहना पड़ा और पीठ भी अकड़ गई। शाम को थोड़ी देर छत पर खड़ी रही, हवा अच्छी लगी पर टहलना उस हफ्ते फिर नहीं हो पाया। शादियों का सीज़न मेरी दुकान पर भी असर डालता है, समय निकालना सच में मुश्किल हो जाता है जी। बेटी वाली बात पढ़कर लगा बच्चे

  • गुनगुन09.22

    शादियों के बाद जाएंगी?

  • → गुनगुनखुशबूलेखक09.22

    शादियों के बाद ही जाऊंगी शायद, अभी अगले 2 हफ्ते तो लगातार कोई ना कोई फंक्शन है। पिछले महीने भी ऐसा ही हुआ था, तीन वीकेंड लगातार शादी में निकल गए और ट्रेक टलता रहा। अभी तो सोच रही हूं जब भी थोड़ा गैप मिलेगा उसी दिन निकल जाऊंगी, चाहे मौसम कैसा भी हो, वरना ये इंतज़ार खत्म ही नहीं होगा।

  • गुनगुन09.24

    बेटी का सवाल पढ़कर अच्छा लगा जी, मेरे यहां भी बच्चे ऐसे ही पूछते रहते हैं और जवाब टालना पड़ता है

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