आज पूरा दिन शादी में ही निकल गया।
सुबह से रात तक खड़े-खड़े पैर सुन्न हो गए।

इस बार वीकेंड ट्रेक के बारे में सोचा भी नहीं, क्योंकि पिछले हफ्ते से शादियों की लाइन लगी है।
फंक्शन में इतनी भीड़ थी कि बात करने का भी टाइम नहीं मिला, बस मुस्कुरा के निकल गई।
घर लौटी तो बच्चे सो चुके थे।
पति ने बच्चों को खाना खिला दिया था, सुनकर थोड़ा अच्छा लगा।
बोले- “थोड़ा रेस्ट कर ले, कल फिर वही रूटीन है।”
पहाड़ की वो सुबह वाली ठंडी हवा बहुत याद आई आज।
अगले हफ्ते भी शादी बाकी है, फिर देखते हैं ट्रेक का क्या होता…
