कुछ दिनों से सिर पर बस काम और घर ही सवार रहता है।
सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, फिर ऑफिस पहुंचना, शाम को वापस वही रूटीन दोहराना।
ऊपर से शादियों का सीजन अलग से चल रहा है। हर दूसरे वीकेंड किसी न किसी की शादी अटेंड करनी पड़ रही है।
पिछले वीकेंड मन बना था पहाड़ों की तरफ निकल जाऊंगी, लेकिन एक और शादी का कार्ड आ गया और प्लान कैंसिल करना पड़ा।
रात को बिस्तर पर लेटते ही एहसास होता है कि दिन भर में खुद के लिए एक पल भी नहीं निकाला।
पति भी अपने काम में उलझे रहते हैं, घर की ज्यादातर जिम्मेदारी मेरे ही हिस्से आ जाती है।
बच्चे भी अब बड़े हो रहे हैं, उनकी अपनी मांगें अलग हैं, उनका ख्याल रखते-रखते खुद का ख्याल पीछे छूट जाता है।
स्किन का रूटीन भी ठीक से फॉलो नहीं कर पा रही, बस भागदौड़ में टाइम ही नहीं मिलता।
कभी-कभी सोचती हूं (सिर्फ आधे घंटे की सैर) मिल जाए तो बहुत है, पर वो भी मैनेज नहीं हो पाता।
आप लोग इतने बिजी शेड्यूल के बीच अपने लिए थोड़ा वक्त कैसे निकाल पाते हैं?
