बेटी के school में आज annual day था।
सुबह से बार-बार बोल रही थी, मम्मी टाइम पर आना जरूर!
मैंने भी हां कर दिया था।

ठीक उसी टाइम पर ऑफिस की meeting लग गई।
टाल भी नहीं सकती थी, बॉस खुद बुला रहे थे।
बेटी को बोला थोड़ा लेट हो जाऊंगी, वो एकदम चुप हो गई।
meeting में बैठी रही पर ध्यान कहीं और ही था।
बार-बार फोन में टाइम देख रही थी।
जब पहुंची तब तक function खत्म हो चुका था।
बेटी stage से उतर चुकी थी, मुझे देखकर कुछ बोली भी नहीं।
बेटा भी संभालना है, घर का काम भी, ऊपर से अपनी तबीयत भी ठीक नहीं चल रही आजकल।
हर तरफ से कुछ न कुछ छूट ही जाता है।
आज अंदर से बहुत बुरा लग रहा है!
