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ऑफिस से लौटते बाज़ार जगमगा रहा था

आज ऑफिस से लौटते हुए बाज़ार पूरा लाइटों से सजा दिखा।

9 बजे थे, फिर भी दुकानों के बाहर भीड़ लगी थी।

घर आकर बच्चों को बताया तो दोनों अभी देखने चलने की ज़िद करने लगे।

इस बार त्योहार के साथ शादियाँ भी लाइन में लगी हैं।

साल कैसे इतना आगे बढ़ गया, पता ही नहीं चला।

कमेंट 3

  • गुनगुन10.03

    अरे यह तो एक दम सच कहा आपने, टाइम का पता ही नहीं चलता इस मौसम में। मेरी दुकान वाली गली में भी शाम ढलते ही लोग सामान देखने निकल आते हैं, पिछले हफ्ते दुकान बंद करके निकली तो भी दुकानों के बाहर भीड़ कम नहीं हुई थी। घर जाकर हिसाब की किताब फिर से खोली तो समझ आया त्योहार का खर्चा अभी से बढ़ने लगा है, और शादियाँ अलग से जुड़ जाएँ तो महीने का बजट पूरा गड़बड़ हो जाता है। बच्चों को लेकर कब निकल रहे हैं जी,

  • → गुनगुनखुशबूलेखक10.03

    सच में, दुकान बंद करने के बाद भी भीड़ नहीं घटती

  • दिल से10.06

    शादियों का सीज़न शुरू होते ही दुकान पर भी भीड़ बढ़ जाती है, यही चल रहा है अभी जी

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