आज ऑफिस से लौटते हुए बाज़ार पूरा लाइटों से सजा दिखा।
9 बजे थे, फिर भी दुकानों के बाहर भीड़ लगी थी।
घर आकर बच्चों को बताया तो दोनों अभी देखने चलने की ज़िद करने लगे।
इस बार त्योहार के साथ शादियाँ भी लाइन में लगी हैं।
साल कैसे इतना आगे बढ़ गया, पता ही नहीं चला।
