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आजकल ब्रेड बनाना ही टाइमपास बन गया है

आजकल सुबह उठते ही ब्रेड का आटा गूंधना रूटीन बन गया है।

रिटायर होने के बाद टाइम तो बहुत है, पर पता नहीं क्यों दिन फिर भी भागता हुआ लगता है।

घर में अब पहले जैसी आवाज़ें नहीं रहतीं, तो बेकिंग से थोड़ा शोर और खुशबू दोनों भर जाते हैं।

आटे में हाथ सने देख के अचानक ख्याल आया, कितने दिन हो गए किसी काम में इतना मन लगाए…

कभी-कभी सोचती हूं, खाली समय इतना मिलने के बाद भी मन क्यों नहीं भरता।

इस बीच कुछ शादियों के कार्ड भी आ गए हैं, सब लगभग एक ही हफ्ते में। किसमें जाऊं किसमें नहीं, ये सोच के ही थकान हो रही है। स्किन भी अभी पूरी तरह सेट नहीं हुई है तो फंक्शन के लिए कपड़े चुनना अलग मसला है।

पति बोल रहे थे ब्रेड बेचना शुरू कर दो। मगर अभी किसी और चीज़ में उलझने का मन नहीं है। बस यही थोड़ी देर का सुकून चाहिए।

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