आज छत पर पानी देते वक्त बैंगन के पौधे में अचानक इतनी बड़ी कली देख ली, मन खुश हो गया!
दुकान खोलने से पहले सुबह-सुबह यही छोटा सा काम होता है, पानी देना और पत्तों को देखना। बाकी दिन तो दुकान और घर के बीच में ही निकल जाता है।
दुकान में आज एक जानी-पहचानी ग्राहक आई, उसने बस नई टाइमिंग के बारे में पूछा, बता दिया और वो चली गई। ऐसे ही मामूली दिन था।
कल रात हिसाब वाली कॉपी में दुकान का और घर का खर्चा अलग-अलग कॉलम में लिखा, पहली बार साफ-साफ दिख रहा था कि महीने भर में कहाँ ज़्यादा जा रहा है। पहले सब एक साथ लिखती थी तो गड़बड़ ही लगता रहता था।
बस इतना ही, आज की छोटी सी बात बता दी।
