रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी दिमाग में कल की क्लास और पार्ट टाइम ड्यूटी का हिसाब चलता रहता है.
नींद नहीं आती, बस सोचती रहती हूं कि क्या भूल गई, क्या करना बाकी है.
कुछ रातों से एक तरीका ट्राई कर रही हूं.
सोने से पहले एक कागज़ पर जो भी सिर में घूम रहा हो, वही लिख देती हूं.
कल क्या पढ़ना है, ड्यूटी में क्या याद रखना है, बस यही.
पहली बात, लिखने में ज़्यादा वक्त नहीं लगता.
दूसरी बात, सुबह उठकर उसी लिस्ट से दिन शुरू करना आसान हो जाता है, दिमाग फिर से उलझता नहीं.
जिस रात लिख पाती हूं उस रात नींद जल्दी आती है.
जिस रात थक कर बिना लिखे सो जाती हूं, वही बातें फिर रात में लौट आती हैं.
(लिखने से बात खत्म नहीं होती, बस कुछ देर के लिए शांत हो जाती है, इतना मुझे समझ आया है)
यहां सभी का अपना-अपना तरीका होता होगा मन को शांत करने का.
मेरे लिए अभी तो यही काम कर रहा है!
