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उस दिन वाली सुई अब तक हाथ में है

पिछली बार सुई हाथ में लेने वाली बात लिखी थी, वो सिलसिला अब तक चल रहा है।

रोज़ नहीं हो पाता, पर हफ़्ते में तीन 4 बार सही सुई उठा ही लेती हूँ अब।

किसी ने कमेंट में लिखा था कि हिसाब की डायरी उनसे भी छूट जाती है, वो पढ़कर अच्छा लगा, कम से कम इस मामले में अकेली नहीं हूँ।

फिर भी डायरी गुरुवार से छूटी हुई थी, आज गिनती की तो पूरे 6 दिन का हिसाब नहीं लिखा मिला।

बुनाई वाली सुई कम से कम हाथ में टिकी हुई है, बस यही राहट की बात है अभी के लिए।

बीच में अनुवाद का एक बड़ा काम आ गया था, 3 दिन सुई हाथ ही नहीं लगी, पर काम खत्म होते ही फिर उठा ली।

ऊन का गोला भी अब लगभग खत्म होने को है, नया लेना पड़ेगा शायद इस हफ़्ते में।

आज सुबह हल्की ठंड लग रही थी, ऊनी शॉल निकाल ली थी बैठने के लिए।

सबको यही बताने का मन हुआ, बाकी कुछ खास नहीं।

कमेंट 3

  • सुकून10.10

    सुई हाथ में रहे, यही सबसे अच्छी बात है जी

  • मुस्कान10.10

    अरे वाह, सुई हाथ में टिकी रहना भी बड़ी बात है जी!

  • खुशबू10.10

    डायरी का हिसाब छूट जाना मुझे भी बहुत अपना सा लगा मेरे यहां भी ऐसे दिन निकल जाते हैं बस (सुई उठाना) बना रहे तो वही राहत की बात है

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