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साथ चलें ›खुली गपशप

आज सबको छोड़कर अकेले टहलने निकली

शादियों का सिलसिला आखिरकार थम गया।

आज शाम घर में कोई काम का दबाव नहीं था।

बच्चों को उनके पापा के पास छोड़कर मैं अकेले निकल गई।

कॉलोनी के बाहर वाली सड़क पर बस चुपचाप चलती रही, कहीं जाना नहीं था।

किसी के घर से हल्के गाने की आवाज़ आ रही थी, हवा में थोड़ी ठंडक भी थी।

काफी दिनों बाद लगा जैसे यह वक़्त (सिर्फ़ अपने लिए) मिला हो।

रास्ते में वही रोज़ वाले अंकल मिल गए, बेंच पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे।

बस मुस्कुरा के हाथ हिला दिया, बात कुछ खास नहीं हुई।

Unisex winter slippers crafted from cotton fabric in a combination of blue and gray hues.

घर लौटी तो बच्चे टीवी के सामने लड़ रहे थे कि रिमोट किसका है।

Blue Fabric

फिर भी मन हल्का-हल्का सा रहा, पता नहीं क्यों।

कमेंट 3

  • मुस्कान10.13

    अकेले टहलना और मन हल्का रहना, मैं समझ सकती हूं जी

  • गुलाबीधूप10.13

    रोज़ ऐसे निकलती हैं जी?

  • → गुलाबीधूपखुशबूलेखक10.13

    नहीं जी, रोज़ नहीं हो पाता। बच्चों और काम के बीच समय ही नहीं मिलता, आज बस मौका मिल गया तो निकल गई।

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