पूरा अक्टूबर खाली जैसा निकल रहा था, 2-3 हफ्ते हाथ में कोई project नहीं था, मन में था कि इस महीने भी ऐसे ही शांति से निकल जाएगा।
फिर मंगलवार को अचानक 3 clients का message एक साथ आ गया, किसी का file तुरंत चाहिए, किसी की deadline कल की है, सब कुछ इकट्ठा हो गया!
रात 12 बजे तक laptop के सामने बैठी रही, बीच में चाय बनाई, फिर बैठ गई, थोडा अजीब लगा कि जो ‘खालीपन’ पिछले महीने था वो अब याद भी नहीं आ रहा।
सुई हाथ में लेने का मन 3 दिन से नहीं हुआ, बुनाई वाला थैला बस कोने में पड़ा है, और डायरी में भी इस हफ्ते एक लाइन नहीं लिखी।
अजीब है ना, जब काम नहीं होता तो समय काटना मुश्किल लगता है, और जब काम आता है तो बाकी सब पीछे छूट जाता है, शायद सब लोग भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव से गुज़रते होंगे।
अभी थोड़ी राहत मिली है तो सोचा लिख दूं, काम फिर रात को शुरू करना है।
