आज सुबह ब्रेड का आटा गूंथते हुए हाथ में जो कमज़ोरी महसूस हुई, वो पहले नहीं होती थी
फ्रीलांस का काम है, तो कभी दिन में टाइम ही नहीं मिलता, कभी हफ्ते भर कुछ काम ही नहीं आता
स्किन अभी स्थिर लग रही है, पर शरीर में ताकत बिल्कुल नहीं बची है ऐसा लगता है
हिसाब-किताब भी 2 महीने से 2 बारा लिखना शुरू किया है, सोचा शरीर का हिसाब भी अब से रखना चाहिए
पर फिक्स टाइम टेबल के बिना एक्सरसाइज़ रूटीन कैसे बनाऊं, किसी का कोई तरीका काम आया हो तो बताएं?
