रात को दफ्तर का तनाव दिमाग में देर तक घूमता रहता है।
उसकी वजह से सोने का समय धीरे-धीरे पीछे खिसकता जा रहा है, जान-बूझकर नहीं, बस ऐसे ही होता जा रहा है।
बच्चों को सुला देने के बाद जो थोड़ा समय अकेले मिलता है, उसी में मन को शांत करने की कोशिश करता हूं।
कभी पुराने कैमरे की फिल्म देख लेता हूं तो कभी बस यूं ही बैठा रहता हूं, और उस बीच घड़ी का ध्यान ही नहीं रहता।
जिस रात देर से सोता हूं, अगली सुबह गर्दन और कोहनी के पास खुजली ज्यादा महसूस होती है।
यह बार-बार दोहराया है, इसलिए पैटर्न साफ दिखने लगा है।
क्रीम का रूटीन तो कर ही रहा हूं, पर नींद की गड़बड़ी शायद असली वजह हो, ऐसा अब लगने लगा है।
ये सिर्फ मेरे साथ ही हो रहा हो शायद, पर दिन में समय निकालना फिलहाल मुश्किल है, इसलिए सोने का समय पीछे धकेलकर वो कमी पूरी करने की आदत बन गई है।
काम की थकान और घर की जिम्मेदारियों के बीच सबमें से जिनको भी नींद देर तक टलने का ये अनुभव हुआ है, उन्होंने समय को वापस पटरी पर कैसे लाया?
