आजकल हाथों और गर्दन की स्किन देखकर खुद हैरान हो जाती हूं।
ऑफिस का प्रेशर बढ़ते ही खुजली भी साथ-साथ बढ़ने लगती है।
बच्चों को सुलाने के बाद जो थोड़ा टाइम मिलता है,
उसमें क्रीम लगाने की बजाय फोन में ही डूबी रह जाती हूं।
सोने का टाइम भी लगातार पीछे खिसकता जा रहा है।
पुराने कैमरे से गली-मोहल्ले की फोटो खींचने का शौक था,
अब वो कैमरा शेल्फ में पड़ा-पड़ा धूल खा रहा है।
घर लौटकर होमवर्क, खाना, फिर ऑफिस का पेंडिंग ईमेल-
अपने लिए वक्त बचता ही नहीं।
डॉक्टर ने स्किन रूटीन बनाने को कहा था, शुरू भी किया था,
पर थकान का बहाना हर बार रूटीन तोड़ देता है।
शायद मेरे साथ ही ऐसा हो रहा हो,
पर लगता है शरीर अंदर की थकान को स्किन के रास्ते बाहर निकाल रहा है।
यहां और लोग भी शायद इसी थकान से गुजर रहे होंगे, ये सोचकर थोड़ा हल्का लगता है।
