आज रात 11 बजे बच्चों को सुलाकर आईने के सामने खड़ी हुई तो गर्दन पर रैशेज़ (फिर से) लाल थे।
2 महीने से रूटीन ठीक रखने की कोशिश कर रही थी।
पर ऑफिस और बच्चों के बीच खुद के लिए वक्त ही नहीं बचता।
बेटे ने पूछा, “मम्मी हाथ पर ये क्या है” तो जवाब देते-देते गला भर आया।
ऊपर से शादियों का सीज़न भी सिर पर है।
बस आज यही मन में था।
