आज सुबह ब्रेड बनाने के लिए आटा गूंध रही थी, कुछ ही देर में हाथ कांपने लगे।
पैर में तो पहले से जोर नहीं बचा, रसोई में 25 मिनट खड़े रहना भी भारी पड़ गया आज।
त्वचा अभी शांत है, महीनों बाद ये सुकून मिला है, पर शरीर में ताकत नाम की चीज़ नहीं बची है।
काम भी कभी बहुत आ जाता है कभी बिल्कुल नहीं, इसलिए रोज़ एक तय समय पर कुछ करना मुश्किल लगता है।

क्या कहूं, ऐसा लग रहा है जैसे स्किन ठीक होते-होते बाकी शरीर पीछे छूट गया।
कहाँ से शुरू करूं समझ नहीं आ रहा, बस यही चलता रहता है दिमाग में आजकल।
