शाम को दुकान बंद करने के बाद हिसाब की किताब निकलती हूं। दिन में खड़े रहने का नियम बना लिया पर रात का हिसाब कुर्सी पर बैठे-बैठे ही होता है।
थोड़ी देर में ही कमर अकड़ने लगती है। रोटी गूंधने से झुकना पड़ता है, ऊपर से हिसाब में भी झुकना तो कमर को आराम कब मिलेगा।
पुरानी कुर्सी पीठ को सहारा नहीं देती। तकिया लगाऊं या कुर्सी बदल दूं, समझ नहीं आ रहा।
शाम का हिसाब कैसे लिखती हो, बैठने का कोई तरीका है क्या?
