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सामान समेटते हुए

स्किन अभी थोड़ी सेटल सी लगती है, पहले जितना उतार-चढ़ाव नहीं है आजकल।

घर से काम करती हूँ तो पूरा दिन बैठे-बैठे निकल जाता है, पॉश्चर का हाल फिर अलग मुद्दा है।

खाली वक्त में फिल्म कैमरे से आस-पास की गलियाँ खींचती रहती हूँ, उसी से सुकून मिलता है।

शिफ्ट होने वाली हूँ जल्द, सामान भी थोड़ा-थोड़ा समेट रही हूँ इन दिनों।

सबका अनुभव पढ़ने आई थी, नमस्ते सबको।

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