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रंग अभी तय नहीं

नमस्ते, मैं खुशबू हूं।
दुकान के काउंटर पर दिनभर खड़े रहने से शाम को पैरों में सूजन रहती है, घर आकर थोड़ी बुनाई करती हूं तो आराम मिलता है।
रंग और नाप अभी तय नहीं कर पाई हूं, इसी उलझन के साथ यहां जुड़ रही हूं।

कमेंट 4

  • चाँदनी रात10.02

    पैरों की सूजन में बुनाई से राहत मिलने की बात सही लगी, पर रंग-नाप तय करने में समय लगाना मुझे ठीक नहीं लगता, मेरे अनुभव में हाथ व्यस्त रखना असल राहत देता है न कि धागे का रंग, मैं भी शाम को करीब 1 घंटे सुई पकड़ लेती हूं चाहे रंग जो भी हो, पहले शुरू कर दीजिए जी, नाप और रंग बाद में भी तय हो ही जाता है, इंतज़ार में वो शांति टल जाती है जो हाथ चलाने से मिलनी थी

  • → चाँदनी रातचुलबुलीलेखक10.02

    हाथ व्यस्त रहना ही राहत है।

  • सुकून10.03

    रंग भी, हाथ भी जरूरी

  • अल्हड़10.10

    पैर दर्द समझती हूं

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