कल रात भी मैसेज देखते-देखते सोने का समय निकल गया।
हारमोनियम रोज 15 मिनट बजाती हूं, फिर भी कम लगता है हाहा।
मन की उलझन लिखकर समझने यहां आई हूं। सबको नमस्ते।
कल रात भी मैसेज देखते-देखते सोने का समय निकल गया।
हारमोनियम रोज 15 मिनट बजाती हूं, फिर भी कम लगता है हाहा।
मन की उलझन लिखकर समझने यहां आई हूं। सबको नमस्ते।
हारमोनियम रोज़ बजाना वाकई मुश्किल है, मन लगाकर बैठना ही बड़ी बात है। मेरी दुकान में भी शाम को हिसाब-किताब फिर से लिखना शुरू किया है, बस 20 मिनट रोज़, पर उतने में मन टिक जाता है। कम लगना शायद इसलिए होता है कि हम नतीजे से जोड़कर देखते हैं जी।
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