काम कम रहने के दिनों में हाथ-पैर हिलाने का मन ही नहीं करता, ताकत जैसे बचती ही नहीं,
सोचती रहती हूं कहां से शुरू करूं, पर सोचते-सोचते दिन यूं ही निकल जाता है।
पिछले कुछ समय से जब भी काम हल्का रहा, घर में ही सीढ़ी चढ़ने-उतरने की कोशिश की,
न कोई मशीन, न कोई ट्रेनर, बस ऊपर-नीचे।
पहले दिन तो सांस फूल गई थी, मन हुआ छोड़ दूं,
पर सोचा एक बार और करके देखती हूं, फिर धीरे-धीरे थोड़ा सहज लगने लगा।
ब्रेड बनाते वक्त भी अब आटा गूंथते हुए हाथ उतनी जल्दी नहीं थकते, ये फर्क खुद महसूस हुआ,
पहले तो थोड़ी देर में ही हाथ भारी लगने लगते थे।
बजट की डायरी भी दोबारा लिखनी शुरू की है, वहां भी यही हाल था, शुरू करने से पहले ही सोचकर थक जाती थी,
पर लिखना शुरू किया तो लगा इतना मुश्किल भी नहीं था।
मतलब, दोनों में एक जैसी बात लगती है, शुरू करने का डर ही सबसे बड़ा अड़ंगा होता है, करते-करते रास्ता खुद दिखने लगता है।
साथियों, आप में से किसी ने भी ताकत कम होने पर ऐसा कोई छोटा तरीका अपनाया है क्या,
या शुरुआत कहां से करें ये समझ ही नहीं आता तो आप क्या करती हैं।
लंबा लिख दिया, माफ़ कीजिएगा।
