साथियों, काम कम रहने के दिन जब खाली बैठे रहना अच्छा नहीं लगता, तो मैंने रसोई में ही कुछ करना शुरू कर दिया।
बाहर से रोटी और ब्रेड मंगाना बंद करके घर में ही आटा गूंधने लगी, पहले तो सिर्फ़ समय काटने के लिए किया था, मतलब कोई बड़ी योजना नहीं थी।
पर हिसाब की कॉपी फिर से खोली तो देखा कि बाहर के खाने पर जो पैसा हर हफ़्ते जाता था वो अब बचने लगा है।
क्लाइंट का काम आए न आए, ओवन तो घर में है ही, तो अब वही भरोसे की जगह बन गई है।
फ्रीलांस में यही दिक्कत है, कमाई का कोई ठीक ठिकाना नहीं, इसलिए घर की छोटी-छोटी बचत भी अब मायने रखने लगी है।
हिसाब की कॉपी में अब रोज़ की रोटी का हिसाब भी साथ में लिखने लगी हूं, देखना है कितने दिन तक यह चलता है।
लंबा लिख गई, माफ़ करना साथियों।
