काम कम था तो घर पर आटा गूंधने बैठी थी, आटा फूलने में करीब 40 मिनट लगते हैं।
पहले उस वक़्त बस मोबाइल देखती थी, 3 हफ़्ते पहले सोचा कुछ और करूं।
ताकत तो है नहीं ज़्यादा, कसरत कहां से शुरू करूं समझ नहीं आता था।
तो बस आटा फूलने के उन्हीं 40 मिनट में, हर बार 5 मिनट हल्की स्ट्रेचिंग करने लगी।
हाथ ऊपर, गर्दन इधर-उधर, बस इतना ही।
पहले हफ़्ते में तो बदन दर्द भी हुआ, लेकिन अब 3 हफ़्ते हो गए, रोज़ करती हूं तो अजीब नहीं लगता।
मतलब कुछ बड़ा नहीं है, बस 5 मिनट है, पर एक तय समय मिल गया तो करना आसान हो गया।
हिसाब-किताब की डायरी भी साथ में टेबल पर खुली रहती है, कभी-कभी उन्हीं 5 मिनट में उसमें भी दो लाइन लिख लेती हूं।
किसी और को भी ऐसे किसी काम के साथ जोड़कर कुछ शुरू करना आसान लगा है क्या?
या मेरे जैसे अकेले बैठे-बैठे सोचते रहते हैं कि कहां से शुरू करूं?
इतना लंबा लिख दिया, माफ़ करना।
