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[बचाया] रोज़ एक डिब्बा खाली करके पैकिंग का समय बचाया

घर शिफ्ट करने की तैयारी करीब 3 हफ्ते से चल रही है।

सामान इतना ज़्यादा हो गया था कि शुरू में हाथ ही नहीं लगा पा रही थी। पूरे दिन बैठे-बैठे काम भी करना होता है, तो थकान अलग से रहती है।

फिर एक तरीका अपनाया –
– रोज़ सिर्फ [एक डिब्बा] भरना
– ज़्यादा सोचे बिना, जो सामने आए वो पहले
– 15-20 मिनट से ज़्यादा नहीं देना

आज तीसरा हफ्ता चल रहा है, अब तक 9 डिब्बे भर चुकी हूं। एक साथ सब करने की कोशिश करती तो शायद अब तक शुरू भी नहीं कर पाती।

कल थोड़ा समय ज़्यादा मिला तो 2 डिब्बे एक साथ भी निकल गए, पर रोज़ का तरीका यही रखा है।

काम से लौटकर बस इतना ही हो पाता है, फिर भी हफ्ते के हिसाब से देखूं तो सामान काफी कम हो गया है।

कमेंट 4

  • तितली05.29

    आपकी यह बात पढ़कर अपने ऊपर की सी लगी, घर के काम में और नाती-पोतों की देखभाल में दिन ऐसे ही निकल जाता है कि किसी एक चीज़ पर ठीक से हाथ ही नहीं लगा पाती, मतलब थोड़ा-थोड़ा करके आगे बढ़ने वाली यह तरकीब सच में काम की लगती है, बस मन को समझाना ही सबसे मुश्किल हिस्सा है, रात को देर तक जागकर भी यही सोचती रहती हूं कि कल से थोड़ा-थोड़ा करके शुरू करूंगी

  • ताज़गी05.30

    रोज़ एक डिब्बा वाला तरीका सच में समझदारी है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, बच्चों के सामान की अलमारी ठीक करनी थी और मैंने सोचा एक ही दिन में निपटा दूंगी, पर शाम तक आधा कमरा बिखरा पड़ा था और अगले दिन उठाने का मन ही नहीं हुआ। तब से समझ आया कि थोड़ा-थोड़ा रोज़ करना ज़्यादा टिकता है, खासकर जब दिन भर की नौकरी के बाद थकान पहले से रहती हो। मेरे केस में शायद यह भी असर करता है कि तनाव शरीर में जमा होता

  • मुस्कान05.30

    ताकत कम है तो शुरू करना ही मुश्किल लगता है, मैं तो 2 दिन में मुश्किल से एक डिब्बा भर पाती हूं

  • मुस्कान05.30

    थके हुए भी रोज़ थोड़ा करना, यही तरीका मुझे भी सही लगता है

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