ताकत बिल्कुल नहीं बची थी, तो शुरुआत कहाँ से करूं यही समझ नहीं आ रहा था बहुत दिन तक।
रोटी बनाते समय ओवन में सिकने का जो टाइम मिलता है ना, उसी में पानी की बोतलें भरकर हल्के हाथ ऊपर-नीचे करने लगी।
पहले तो हाथ ही कांपने लगते थे, वज़न बहुत हल्का होने पर भी।
अब हर बार रोटी सिकते वक़्त यही करती हूं, टाइमर की आवाज़ का इंतज़ार करना भी अजीब तरीके से अच्छा लगने लगा है।
काम ज़्यादा रहने वाले हफ्तों में याद ही नहीं रहता, पर काम कम हो तो यही एक चीज़ पक्की कर लेती हूं।
घर का हिसाब-किताब भी साथ में लिख रही हूं इन दिनों, दोनों चीज़ें साथ-साथ ही याद रहती हैं, मतलब समझ नहीं आता क्यों।
साथियों, आप में से किसी ने रसोई के काम के साथ ऐसे कुछ जोड़कर देखा है क्या, जो अपने आप याद रह जाए वैसा कुछ।
बहुत लंबा लिख दिया, माफ़ करना।
