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[किया] चाय बनते समय थोड़ी देर टहलने की आदत डाली

चाय बनने का इंतज़ार करते-करते बस थोड़ा टहलना शुरू किया, कुछ खास सोचकर नहीं, बस केतली की सीटी बजने तक यूँ ही खड़े रहना अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए।

काम कम होता है तो घर में इधर-उधर घूम लेती हूँ, काम ज़्यादा होता है तो उतना टाइम भी नहीं मिलता, तो जब भी चाय या कॉफ़ी बनानी होती है वो थोड़ा-सा वक़्त पकड़ लेती हूँ।

शुरू में तो बस थोड़े कदम ही चली, फिर धीरे-धीरे रसोई से बालकनी तक जाने लगी।
पैरों में ताकत अभी भी कम है, लेकिन खड़े रहना अब पहले से थोड़ा आसान लगता है।

मतलब कुछ बड़ा नहीं किया, बस केतली को बहाना बना लिया।

साथियो, आप लोग भी काम के बीच में ऐसे छोटे-छोटे तरीके निकालते हैं क्या…
जिस दिन बिलकुल मन नहीं करता, उस दिन क्या करती हैं आप लोग, वो भी जानना चाहती हूँ।

लंबा लिख दिया, माफ़ करें।

कमेंट 2

  • सुहानी05.14

    केतली की सीटी तक टहलना वाला आइडिया अच्छा लगा, शाम को खड़े रहने से मेरे भी पैर भारी हो जाते हैं

  • तितली05.15

    चाय की केतली वाली बात पढ़कर अपना रसोई का समय याद आ गया, दिनभर काम और नाती-पोतों के बीच हाथ गीले-सूखे होते रहते हैं तो बीच-बीच थोड़ा उठकर बालकनी तक चली जाना अच्छा लगता है, बरसात के बाद से गर्दन और कोहनी के मोड़ पर खुजली बढ़ गई है तो लगातार बैठे रहने से शायद और बढ़ जाता है ऐसा लगता है, हल्दी-नीम का लेप लगाया था तो कुछ दिन आराम रहा फिर वैसा ही हो गया जी, समझ नहीं आता किस चीज़ से बढ़ रहा है, दूध

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