काम कम रहने पर आजकल कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाना शुरू किया है।
पहले तो लगा कि इतनी ताकत ही नहीं बची कि कुछ ठीक से कर सकूं, मतलब कहाँ से शुरू करूं यही समझ नहीं आ रहा था।
freelance का काम कभी बहुत ज़्यादा रहता है तो कभी बिल्कुल नहीं, उसी खाली समय में कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर सीधा करके थोड़ी देर ऊपर उठाकर रखने लगी।
रोटी सिकते वक़्त तो पहले से हल्की कसरत करते आ रहे थे, ये उससे अलग है, बस बैठे-बैठे ही होता है इसलिए client का call भी साथ में चलता रहता है।
पैर थोड़े कांपने लगते हैं जब ऊपर रखे रहती हूं, ताकत इतनी कम हो गई है ये तभी पता चला!
हिसाब की कॉपी में भी अब यही लिखने लगी हूं कि कौन से दिन ये किया, कौन से दिन भूल गई।
शुरुआत में सबको यही दिक्कत होती है क्या, कि कहाँ से हाथ डालें समझ ही नहीं आता?
