ताकत बिल्कुल नहीं थी, कहाँ से शुरू करूं यही समझ नहीं आ रहा था।
रसोई की स्लैब का सहारा लेकर दिन में थोड़ा सा स्क्वाट करना शुरू किया, मतलब बस घुटने मोड़कर वापस सीधे खड़े होना।
पहले दिन सिर्फ 6 बार हो पाया, उससे ज़्यादा पैर कांपने लगे थे।
फ्रीलांस काम है तो कभी दिन भर लैपटॉप पर बैठे रहना पड़ता है, कभी दोपहर तक कोई काम ही नहीं होता।
काम कम रहने वाले दिन स्क्वाट के लिए वक्त निकालना आसान हो जाता है, ये नोटिस किया।
हिसाब की कॉपी फिर से लिखना शुरू की थी, उसी के कोने में हर दिन बस एक निशान बना देती हूं, किया तो टिक, नहीं किया तो खाली।
2 हफ्ते से यही चल रहा है, गिनती अब 6 से बढ़कर 10 तक पहुंच गई है।
रोटी सेकते वक्त भी यही करती हूं, आटा गूंधते हुए हाथ पहले से थोड़े मज़बूत लगने लगे हैं।
बाकी शरीर की बात अलग है, अभी बहुत कुछ बाकी है, पर छोटे से शुरू किया तरीका अभी तक टिका हुआ है।
