ताकत बिल्कुल नहीं है ये पहले से पता था, पर शुरुआत कहां से करूं यही समझ नहीं आ रहा था। जिम जाने की हिम्मत नहीं जुट रही थी, तो सोचा जो आदत पहले से है वहीं से कुछ जोड़ लूं। स्केच करने की आदत है मुझे, तो जब भी एक पेज पूरा होता है पेन नीचे रखकर कंधे घुमाती हूं, कलाई भी थोड़ी देर हिलाती हूं। पहले लगता था इतने छोटे से मूवमेंट से क्या फर्क पड़ेगा? कुछ होगा भी या नहीं, यही सोचती रहती थी। पर कुछ दिन से करते हुए महसूस हो रहा है हाथ उतने अकड़े हुए नहीं लगते जितने पहले लगते थे। जॉब के लिए रिज्यूमे और फॉर्म भी लैपटॉप पर ही भरने पड़ते हैं, वहां भी यही तरीका अपनाया, एक सेक्शन भरकर कंधे पीछे खींचती हूं, थोड़ी देर खड़ी हो जाती हूं। किताब पढ़ने की भी कोशिश कर रही हूं इन दिनों, चैप्टर खत्म होते ही उठकर थोड़ा टहल लेती हूं, फिर वापस बैठ जाती हूं। किसी ने पूछा भी कि इतनी छोटी चीज़ से क्या होगा, पर भारी एक्सरसाइज़ सोचकर तो कभी शुरुआत ही नहीं होती। यहां सबको बस इतना बताना चाहती थी कि इतनी छोटी चीज़ से भी कुछ फर्क पड़ता है, शरीर में पहले जैसी अकड़न अब कम लगती है।
[किया] स्केच के बीच-बीच रुककर कंधे और कलाई घुमाई
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