पूरे दिन खड़े होकर काम करने की वजह से शाम तक पैर और टखने फूल जाते थे। हफ्तों से यही परेशानी चल रही थी, तो कुछ बदलने की सोची।

सबसे पहले घर आकर सीधे सोफे पर बैठ जाती थी, उससे सूजन और बढ़ जाती थी ऐसा लगा। अब काम से लौटकर पैरों को दीवार के सहारे ऊपर टिका कर कुछ देर लेटना शुरू किया। रसोई का काम खत्म करने के बाद सबसे पहले यही करती हूं।
इसके साथ रात को सोते वक्त पैरों के नीचे मोटा तकिया रखने लगी। पहले तकिया सपाट ही रखती थी, उससे खास फर्क नहीं पड़ता था। तकिया थोड़ा ऊंचा किया तो सुबह पैर पहले जितने भारी नहीं लगते।
मां ने भी कहा था- “बैठे-बैठे टखने घुमाया कर, फर्क पड़ता है।” तो काम के बीच जब भी थोड़ा मौका मिलता है, टखने घुमा लेती हूं।
खाने में नमक थोड़ा कम करने की भी कोशिश कर रही हूं, इससे भी सूजन में हल्का फर्क दिख रहा है।
अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, पर शाम को पहले जितना भारीपन नहीं लगता।
